पिछले दिनों भदोही जनपद के ज्ञानपुर ब्लाक अंतर्गत गांव पिलखुना की खबरें प्रकाशित हुई थी, जिसके बाद एक दर्जन से ज्यादा ग्रामवासियों ने बारी-बारी ‘सशक्त समाज न्यूज’ को काॅल किया और जमीनी हकीकत से रूबरू करवाया. यहां ग्राम प्रधान के पक्षकारों ने कई तरह के दावे भी किए…आखिरकार एक समर्थक ने तो यहां तक कह दिया कि “काम देखिए…नाम तो पुश्तैनी जनसेवा में चर्चित है.!!”
गौरतलब है कि विकास कार्य में लचीलापन और धीमी गति को लेकर पिलखुना गांव की खबरें प्रकाशित हुई थी, जिसके बाद ग्राम प्रधान के कुछ पक्षकारों को छोड़कर कहीं कोई विशेष बौखलाहट देखने को नहीं मिली. ग्राम प्रधान परिवार से भी किसी ने कोई सफाईपूर्ण या गुंडई भरा काॅल नहीं किया. हां..यह काम कुछ ग्राम प्रधान के समर्थकों ने जरूर किया कि गांव में जो कार्य धरातल पर हो रहे हैं, उसके गुणवत्ता और बेहतर क्वालिटी को लेकर कुछ तस्वीरें वायरल कर दिया. इन तस्वीरों में साफ झलक रहा है कि जो भी कार्य ग्राम पंचायत नीधि से कराए जा रहे हैं, वह गुणवत्ता का बखान कर रहे हैं।

पिलखुना गांव के ही एक युवा आरएसएस कार्यकर्ता भरत मिश्र बताते हैं कि स्व. प्रभु नारायण मिश्रा व मुनि नारायण दोनों राम लक्ष्मण की तरह थे, जिनके नाती विनोद मिश्रा हैं. विनोद मिश्रा का परिवार पुश्तैनी चर्चित रहा है क्योंकि यह परिवार क्षेत्र के बड़े काश्तकारों में भी जाना जाता रहा है. गांव-समाज के प्रति स्व. प्रभु नारायण मिश्रा भी समर्पित जनसेवा कार्य से जुड़े थे, जिनके कार्य की कहानियां हम जैसे गांव के युवाओं को भी प्रेरित करती है।

स्वच्छ पेयजल के लिए हैंडपंप रिबोर ही नहीं बल्कि चबूतरा व जलनिकासी की व्यवस्था भी यहां ग्राम प्रधान द्वारा जारी है…
ग्रामीण बताते हैं कि विनोद मिश्रा के पिता हरिशंकर मिश्रा ने पुश्तैनी किसानी में बढ़ती समस्याएं व बढ़ती लागत का बैलेंस बनाए रखने के लिए कलकत्ता शहर में नौकरी किया. फिलहाल सेवानिवृत्त होकर मातृभूमि (पिलखुना गांव) में उपस्थित हैं. मान-सम्मान व स्वाभिमान के बढ़ते पारिवारिक कारवां को मजबूती प्रदान करने के लिए आगामी पीढ़ी में विनोद मिश्रा ने मोर्चा संभाला और धीरे-धीरे मायानगरी मुंबई में उद्योग स्थापित करके नवपीढ़ी का मार्गदर्शन किया, जिसके बाद भी गांव के धार्मिक-सांस्कृतिक व जनसेवा कार्यों में तन-मन-धन से उपस्थित रहे।
गुणवत्ता से परिपूर्ण खंड़ंज्जा निर्माण कार्य की तस्वीरें भी वायरल हैं….
आपदा में मिला अवसर – मुख्यत: कोरोना काल में बहुत ही संघर्षशील परिस्थिति में गांव-समाज पहुंचे विनोद मिश्रा ने स्वयं को संभालते हुए विषम परिस्थितियों में भी गांव-समाज में पुश्तैनी जनसेवा कार्य करते रहें, जहां आगामी कुछ महीनों बाद हुए ग्राम पंचायत चुनाव में ग्रामवासियों ने उन्हें उतारा. अचानक महिला सीट होने पर उनके नेतृत्व में उनकी पत्नी को ग्राम प्रधान का ताज पहना दिया।