कोरोना काल ने यूपी सरकार के दावों की पोल खोल दी है. भाजपा के बड़े-बड़े समर्थक अधिकारी-पत्रकार भी अब ‘जय श्रीराम’ कहकर भाजपा का बखान करना छोड़ रहे हैं. आखिरकार छोड़े भी क्यों नहीं, जब अपने ही पुश्तैनी गांव पहुंचे और भ्रष्टाचारी कीचड़ की कालिमा में लथेर दिए गए हों. कुछ ऐसा ही अनुभव जौनपुर के इस गांव से समक्ष आया. जब भाजपा के शेखीबघार शहरी अधिकारी-पत्रकार गांव की समस्याओं को लेकर सेकेट्ररी, डीपीआरओ या सीडीओ को काल किए तो, जवाब मिला कि हमनें उनसे कह दिया है…एक राष्ट्रीय न्यूज चैनल के पत्रकार बड़ी-बड़ी डिबेट करते हैं लेकिन अपने ही गांव के विकास के लिए बता रहे कि हर अधिकारी से यही जवाब मिला कि आप बेफिक्र रहें, हमनें उनसे कह दिया है… महीनों बीत जाने के बाद भी समस्या जस की तस बनी है तो उन्हें ही नहीं समझ में आ रहा है कि किस अधिकारी ने किससे क्या कह दिया है…अब भ्रष्टाचार से लस्त गांव से डियुटी पर लौटे सुप्रसिद्ध न्यूज चैनल के वरिष्ठ पत्रकार महोदय तो, गांव वाले काॅल करके कांव-कांव कर रहे हैं, पढ़िए फिर उन्होंने क्या लिखा…..

देश का विकास तेजी से हो रहा है, इसमें कोई संदेह नहीं, किन्तु हमारे पुश्तैनी गाँवों की टूटी-फूटी सड़कें और बहता गंदा पानी, टूटा हुआ पंचायत भवन यही कह रहा है कि वहां पर कोई विकास या सुधार नहीं हो रहा है. इस ‘ब्लॉग’ में मैं अपने गाँव की स्थिति बयां कर रहा हूँ. जौनपुर जिले के मछलीशहर स्थित लगभग हजारो की आबादी वाला चौकी खुर्द गांव, जोकि विकास के नाम पर शून्य की स्थिति में है. गांव में ईंट बिछी वर्षों पुरानी सड़के बेहद खस्ताहाल में है. बारिश के मौसम में तो इस सड़क पर चलना तक दुश्वार हो जाता है. इस सड़क की मरम्मत के लिए आला अधिकारियों  के पास तक गांव के कई जागरूक लोग दौड़ लगाए, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला.

गांव के पुश्तैनी सार्वजनिक महादेव मंदिर परिसर खंडहर हो चला है, मनरेगा मजदूर नहीं बल्कि ग्रामीण श्रमदान पर मजबूर…

गलियां कच्ची होने के कारण वहां पर हमेशा कीचड़ की समस्या बनी रहती है. इससे लोगों को आने-जाने में काफी परेशानी झेलनी पड़ती है. गलियों में भरे गंदे पानी और कीचड़ से आसपास दुर्गंध फैली रहती है. खतरनाक मच्छरों के बढ़ने से मलेरिया और डेंगू का ख़तरा भी बना रहता है. कई बार शासनिक-प्रशासनिक अधिकारियों से गाँव में मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने हेतु मांग की गई, लेकिन आज तक समस्या का समुचित समाधान नहीं हुआ. शासनिक-प्रशासनिक अधिकारियों को चाहिए कि वो सड़क और पंचायतघर का निर्माण कराये, जोकि प्रधान-सेकेट्ररी ने सिर्फ कागज पर करवाकर गांव को भ्रष्टाचार से लस्त कर दिया है. इस क्षेत्र में कूड़ा-कचरा फेंकना भी एक बड़ी समस्या है, जिसके लिए ग्राम समाज की अतिक्रमण हुई जमीनों की शिनाख्त ही नहीं हुई है. ऐसे में कुड़ा-कचरा गांव से उठाकर ले जाने की शासकीय व्यवस्था भी नहीं है तो कई जगहों पर संक्रामक बीमारियों को आमन्त्रण मिल रहा हैं. मज़बूरी में गाँव में लोग घर से निकलने वाले कचरे के ढे़र से कागज व प्लास्टिक आदि अलग कर जला देते हैं और सब्जी के छिलके पशुओं को खिला देते हैं। गांव के सार्वजनिक देवी-देवताओं के स्थल परिसर की दयनीय स्थिति है, जबकि योगी आदित्यनाथ की सरकार में अयोध्या में श्रीराम मंदिर बन रहा है कि गांव के शासनिक अधिकारियों ने देवी-देवताओं के परिसर को भी चापाकल-बोरिंग, सोखता व कुआं जिर्णोध्दार से भी वंचित कर रखा है. जौनपुर के डीएम भी भ्रष्टाचार के खिलाफ सिंहनाद करते रहते हैं लेकिन गांवों से मिलने शिकायतों पर कभी उसी रास्ते से गुजरते हुए औचक निरीक्षण का औचित्य नहीं समझते।

लाखों से बना खंडहर होते पंचायतघर में विकास की पंचायत नहीं होती, शायद इसीलिए गांव में सरकारी संपत्ति और सुविधाएं विनाश की ओर हैं…

अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं. फिर वही यक्ष प्रश्न वोट किसे दें और क्यों दें.? लोग चुनाव में वोट देते हैं, क्षेत्र के विकास के लिए, तो फिर क्षेत्र का विकास तो होना चाहिए, नहीं तो वोट देने से फायदा क्या है.? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मैं बहुत इज्जत करता हूँ और उन्हें भविष्य का एक बेहतर राष्ट्रीय नेता भी मानता हूँ, उनसे मेरी गुजारिश है कि कभी इस गांव में भी आएं, शायद समस्याएं देखकर एहसास हो कि उनकी योजनाओं का लाभ कितना एक आम ग्रामीण इंसान को मिलता है, जोकि सरकार बनाने वाला असली वोटर है।

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