सांकेतिक तस्वीर....

समाज के ठेकदारों को ना तो कानून का डर और ना ही मानवता का। बस अपना फरमान सुनाकर अपने को सर्वश्रेष्ठ ‘दूध का धूला’ घोषित करना तथा किसी अन्य के सम्मान की धज्जियां सार्वजनिक उड़ा देना।.                                         गौरतलब है कि धार्मिक ध्वजवाहकों की नगरी काशी-प्रयाग मध्य में अब सामाजिक ठेकेदारों ने कानून को अपने हाथ में लेकर सामाजिक बहिष्कार का सार्वजनिक तुगलकी फरमान जारी करना शुरू किया हैं। वाहवाही लूटते हुये बयां कर रहें हैं कि वह व्यक्ति जिसके लिए बहिष्कार की सहमति बनी है, वह गांव में अमन चैन व सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का कार्य करता है तथा युवाओं और संभ्रांत व्यक्तियों को झूठे मुकदमें में फंसाकर परेशान करता है। ऐसे में उन्होनें आम सहमति बनाकर उस व्यक्ति के सामाजिक बहिष्कार का ऐलान कर दिया तथा साथ में यह भी चेतावनी भी दी है कि जो भी उस बहिष्कृत से सामाजिक संबंध रखेगा…उसका भी सामाजिक बहिष्कार कर दिया जायेगा। इस तरह की सहमति पत्र पर लगभग तीन दर्जन से अधिक लोगों ने हस्ताक्षर भी किया है। इतना ही नहीं बल्कि सहमति पत्र को बाकायदे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया है।

अब यहां सवाल उठता है कि तथाकथित लोगो द्वारा बहिष्कृत व्यक्ति यदि इतना परेशान करता था तो देश में संविधान है व उत्तर प्रदेश में कानून के साथ ‘योगीराज’ भी…उसके खिलाफ शिकायत की जा सकती थी और न्यायालय उस व्यक्ति को उसके अपराध के हिसाब से सजा देती। अब समाज के ठेकेदारों से यह सवाल लाजमीं है कि किसी व्यक्ति को समाज से बहिष्कृत करने की घोषणा और फिर सोशल मीडिया पर वायरल करके बदनाम करने का कार्य कितना सही है..?  यह मामला प्रयागराज जिले के काशी-प्रयाग मध्य स्थित हंडिया थाना अंतर्गत ‘बोधी के बारी’ गांव का है, जहां के समाज के ठेकेदार स्वयं को न्यायालय से भी ऊंचा समझते हुए यह फरमान जारी किया है। फिलहाल अभी तक यह मामला पुलिस की जानकारी में नही आया है। जगजाहिर है किसी का सामाजिक बहिष्कार करके उसका सार्वजनिक उत्पीड़न करना कानूनन अपराध है क्योंकि किसी के गलत कार्यों व अपराधों की सजा न्यायालय निश्चित करती है न कि कुछ तथाकथित समाज के ठेकेदार। बताया जा रहा है कि उक्त तुगलकी फरमान झेल रहा व्यक्ति अध्यापक हैं।

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