मुंबई (सं. भा.)। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के लोग आवारा कुत्तों के आतंक से परेशान हैं। पिछले ५ महीने में मुंबई में ३६ हजार, ४३१ नागरिकों को कुत्तों ने काट लिया। अकेले अप्रैल महीने में १० हजार से अधिक लोग आवारा कुत्तों के शिकार हुए थे। विधानसभा में यह जानकारी शहरी विकास राज्य मंत्री योगेश सागर ने दी। सागर ने बताया कि राज्य में एंटी रेबीज टीकों की कोई कमी नहीं है। उन्होंने बताया कि मुंबई में इस साल जनवरी में रेबीज के ७,३७८ मामले, फरवरी में ४, ६६४ मामले, मार्च में ८, ०३६ मामले, अप्रैल में १०,६४० मामले और मई में ५, ७१३ मामले सामने आए हैं।

विधानसभा में उठा मुद्दा

उन्होंने स्वीकार किया कि १० जनवरी से २० जनवरी के बीच टीके की आपूर्ति में थोड़ी सी कमी आई थी, लेकिन इसकाकारण गुणवत्ता था। यह कमी मुंबई के सिर्फ एक भाग में ईथी, बाकी हिस्सों में टीके की कोई कमी नहीं थी। फिलहाल राज्य में एंटी रेबीज टीके की अभी कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि आपूर्ति करने वाले ठेकेदार को आपूर्ति में देरी के लिए दंडितकिया गया है। इसके बावजूद टीके की आपूर्ति जारी है। यह जानकारी मुंबई मनपा ने दी है।

शुक्रवार को विस में विधायक अमीन पटेल, असलम शेख, नसीम खान और अतुल भातखलकर ने मुंबई में कुत्तों के आतंक का मामला उठाया। विधायकों ने सरकार से पूछा कि क्या राज्य में एंटी रेबीज टीके की कमी है।

५ माह में कुत्तों के शिकार

जनवरी-७३७८

फरवरी- ४६६४

मार्च- ८०३६

अप्रैल- १०६४०

मई- ५७१३

५ साल में ५ लाख से अधिक कुत्तों के शिकार

गौरतलब है कि पिछले ५ साल में कुत्ते के काटने के ५ लाख से अधिक मामले मुंबई में दर्ज हो चुके हैं। इनमें सबसे अधिक १,०९,५६३ मामले पिछले साल सामने आए थे।

पिछले साल बीएमसी ने अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों परसर्वे कराया था, जिसके अनुसार, हाइपरटेंशन, मानसिक बीमारियों के बाद उपचार के लिए आने वाले ज्यादातर लोग कुत्तों के शिकार थे।

इसी साल अप्रैल महीने में कांदिवली में एक हाउसिंग सोसायटी में रहने वाले दो लोगों पर ३.५० लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। क्योंकि उन्होंने आवारा कुत्तों को सोसायटी के अंदर खाना खिलाया था। जो सोसायटी के नियमके अनुसार अपराध है।

वहीं फरवरी महीने में वडाला के दो बच्चों को कुत्ते ने स्कूल के गेट पर काट लिया था। जिनका उपचार सायन अस्पताल में कराया गया था।